Lit-Up (Micro-fiction)

The world was sleeping, and so was I. But the moon was just rolling onto the hammock of silvered sequins of stars upon a blue brocade sky of luxury. Lace and velvet whispered into the midnight quietude.

A bright streak of silver glow outside my bedroom window coaxed me out of my bed. The night was falling down around me in radiant sparks of incandescent exclamation marks. Shooting stars eloped from the sutures of the dark in quick cleaves—their light enfolded into their beautiful tails of wreckage—too complicated to be deciphered by words.

The midnight-blue sky was strewn over with handsome birds with beguiling sterling tails. I was smitten.

But just as soon as it had started, it ended, too. The fireworks doused themselves. The remnants of the celestial rocks lit the night-time mantle—like camping lights in the tent of a silken cobalt hush—too beautiful, too surreal. The birds of silver flew past my coveting eyes towards the canopy overhead with a final burst of energy which surged through them; and finally extinguished themselves to nothingness.

Do all wondrous things happen unawares?

I wondered.

Hindi Translation:

जहाँ सो रहा था, और मैं भी. लेकिन चाँद! अजी वो तो विलासी जरीदार नीले आकाश के ऊपर सितारों की चंद्र शाखाओं की लड़ी बिछाकर करवटें ले रहा था. रेशे और मखमल तभी अर्धरात्रि के सन्नाटे में फुसफुसाए.

मेरे बिस्तरखाने की खिड़कियों से छनकर आती चंद्र रोशनी ने मुझे रिझाया. रात्रि जैसे मेरे चारों ओर विस्मय चिन्हों की फुलझड़ियाँ बिखेर रही हो. अंधेरे की दरख्तों से टूटते तारे जैसे छुप कर भाग रहे हों; तारों के उन खूबसूरत टूटे पूच्छलों में लिपटा प्रकाश; लब्जों में बयाँ नहीं कर सकती.

अर्धरात्रि के नीलगगन पर बिखरे हुए वो मादक मनमोहक दुम वाले खूबसूरत पंछी. मैं तो बस फिदा हो गई.

पर जैसे ही ये शुरू हुआ, खत्म भी हो गया. आतिशबाजी खुद ही बुझ गयी. आकाशगंगा के पत्थरों के उन बिखरे टुकड़ों ने रात्रि में रोशनी बिखेरी; जैसे रेशमी सलेटी तंबूओं से छनकर आती रोशनी; अतिसुंदर, अलौकिक. वो चंद्र पंछियाँ अपनी आखिरी ऊर्जा से मेरी मोहित अाँखों से गुजर गयी ऊपर के शामियाने की ओर. और फिर शून्य में विलीन.

क्या ये सबकुछ अनजाने ही होता है?

(All thanks to Praveen sir for this exquisite piece of craft in Hindi. If you haven’t checked out his blog already, head over to his place right away!)

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6 thoughts on “Lit-Up (Micro-fiction)”

  1. जहाँ सो रहा था, और मैं भी. लेकिन चाँद! अजी वो तो विलासी जरीदार नीले आकाश के ऊपर सितारों की चंद्र शाखाओं की लड़ी बिछाकर करवटें ले रहा था. रेशे और मखमल तभी अर्धरात्रि के सन्नाटे में फुसफुसाए.

    मेरे बिस्तरखाने की खिड़कियों से छनकर आती चंद्र रोशनी ने मुझे रिझाया. रात्रि जैसे मेरे चारों ओर विस्मय चिन्हों की फुलझड़ियाँ बिखेर रही हो. अंधेरे की दरख्तों से टूटते तारे जैसे छुप कर भाग रहे हों; तारों के उन खूबसूरत टूटे पूच्छलों में लिपटा प्रकाश; लब्जों में बयाँ नहीं कर सकती.

    अर्धरात्रि के नीलगगन पर बिखरे हुए वो मादक मनमोहक दुम वाले खूबसूरत पंछी. मैं तो बस फिदा हो गई.

    पर जैसे ही ये शुरू हुआ, खत्म भी हो गया. आतिशबाजी खुद ही बुझ गयी. आकाशगंगा के पत्थरों के उन बिखरे टुकड़ों ने रात्रि में रोशनी बिखेरी; जैसे रेशमी सलेटी तंबूओं से छनकर आती रोशनी; अतिसुंदर, अलौकिक. वो चंद्र पंछियाँ अपनी आखिरी ऊर्जा से मेरी मोहित अाँखों से गुजर गयी ऊपर के शामियाने की ओर. और फिर शून्य में विलीन.

    क्या ये सबकुछ अनजाने ही होता है?

    Liked by 1 person

      1. जब फनकार ही लाजवाब हो, तो जुगलबंदी करने वालों को भी आनंद आता है. वैसे ये आसां नही था. मैं तो चाहूँगा आप अपनी अंग्रेजी के साथ मेरा हिंदी अनुवाद लगा दें. द्विभाषी ब्लॉग का मजा ही कुछ और है.

        Liked by 1 person

      2. Thank you so much for your kind words, sir. It has been a long week and this just made my night. To be honest, I was wondering the same but I wasn’t so sure about approaching you with this little idea of collaboration. Thanks to you, though! 😅
        P.S. It’s so weird replying in English. It’s heck of a job typing in Hindi. Please bear with me.
        P.P.S. Your words are like magic. You craft them so beautifully.

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